प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से जिले के ग्राम गंगई निवासी रुद्राक्ष शर्मा ने मत्स्य पालन को व्यावसायिक स्वरूप देते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया है। वर्ष 2024–25 में शहरी तालाब निर्माण घटक के तहत उन्हें 4 लाख 40 हजार रुपये की अनुदान सहायता प्राप्त हुई। शासन की इस सहायता से उन्होंने आधुनिक मत्स्य पालन की दिशा में आगे बढ़ते हुए अपने मत्स्य पालन व्यवसाय को स्थापित एवं विस्तारित किया।
वर्तमान में श्री शर्मा अपने दो तालाबों में प्रतिवर्ष लगभग 45 हजार पंगास मछली बीज का संचयन करते हैं। वैज्ञानिक प्रबंधन, गुणवत्तायुक्त आहार एवं रोग नियंत्रण के उपायों को अपनाकर वे दोनों तालाबों से लगभग 25–28 मीट्रिक टन वार्षिक मत्स्य उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। इससे उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 4–5 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हो रहा है।
रोहू व कतला मछली बीज का भी संचयन
श्री शर्मा पंगास मछली के साथ-साथ दोनों तालाबों में लगभग 4 से 5 हजार रोहू एवं कतला मछली बीज का भी संचयन करते हैं। मिश्रित मत्स्य पालन के माध्यम से वे तालाब में उपलब्ध प्राकृतिक आहार एवं विभिन्न जलीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करने का प्रयास करते हैं। इसके साथ ही वे नियमित रूप से तालाब की जल गुणवत्ता, मछलियों की वृद्धि एवं आहार प्रबंधन पर ध्यान देते हैं। इससे तालाब के रखरखाव एवं संचालन लागत को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है।
तकनीकी जानकारी को मत्स्य पालन में अपनाया
मत्स्य पालन के दौरान मछलियों में होने वाली बीमारी एवं मृत्यु दर उत्पादन और लाभ को प्रभावित कर सकती है। इस चुनौती को समझते हुए श्री शर्मा ने हाल के उत्पादन चक्रों में रोग प्रबंधन संबंधी तकनीकी जानकारी प्राप्त की तथा उसे अपने मत्स्य पालन में अपनाया।
