डिंडौरी में फलदार पौधों तक थोड़ा-थोड़ा पानी पहुँचाने के लिए स्व-सहायता समूहों ने अनुपयोगी प्लास्टिक बोतलों और मिट्टी के घड़ों को सिंचाई के छोटे साधन में बदला। 11 मई 2026 की सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष “एक बगिया मां के नाम” पहल में 700 समूह सदस्यों के यहाँ 3,500 फलदार पौधे लगाए गए थे।

हर पौधे के पास रखी बोतल या जमीन में गड़ा घड़ा पानी को धीरे-धीरे जड़ों तक पहुँचाता है।

परिसर के हिसाब से अलग रास्ता

प्रशासन ने बताया कि छात्रावासों और आंगनवाड़ी केंद्रों में भी पौधों की देखभाल के लिए यह तरीका अपनाया गया। जहाँ पाइप से निकासी संभव थी, वहाँ रसोई और स्नानघर से निकलने वाला पानी नालियों के जरिए पौधों तक मोड़ा गया। दूसरी जगह सोख्ते और वर्षा-जल संचयन के ढाँचे बनाए गए।

मुख्य बातें

  • 700 स्व-सहायता समूह सदस्यों के यहाँ 3,500 फलदार पौधे लगाए गए थे।
  • पानी की अनुपयोगी बोतलों और मिट्टी के घड़ों से बूंद-बूंद सिंचाई बनाई गई।
  • प्रशासन ने छात्रावासों और आंगनवाड़ी केंद्रों में भी इस तरीके के उपयोग की सूचना दी।

स्रोत और संदर्भ

  1. मध्यप्रदेश जनसम्पर्क विभाग / MPInfo · हर बूंद अमूल्यः डिंडौरी ने जल संरक्षण में लिखा जनभागीदारी का नया अध्याय ↗11 मई 2026

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 16 सितंबर 2026।

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